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सांसदजी कहा के है काई तो बोलो : सुप्रीम कोट |
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असम से कांग्रेस के विवादित सांसद मणि कुमार सुब्बा की नागरिकता सुप्रीम कोर्ट की जांच के दायरे में है।
कोर्ट ने उनकी नागरिकता पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाने के लिए केंद्र और सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इस मामले में सुब्बा को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस बात से नाराज है कि सीबीआई ने तेजपुर के सांसद द्वारा पर्चा भरने के दौरान जमा किए गए अत्यंत संदिग्ध दस्तावेजों और हलफनामे को ज्यादा तरजीह दी। सीबीआई ने मामले की जांच में उन पर अपनी राष्ट्रीयता सिद्ध करने के लिए दबाव नहीं बनाया। प्रधान न्यायाधीश के जी बालकृष्णन और न्यायमूर्ति डी के जैन की पी ने सीबीआई द्वारा सुब्बा का जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल के प्रमाणपत्र आदि नहीं जांचने पर कड़ा एतराज किया। पी ने कहा कि सीबीआई ने अपनी जांच में कहा है कि यह बात सिद्ध करने का कोई आधार नहीं है कि सुब्बा नेपाली नागरिक हैं। पी ने कहा कि प्राथमिक तौर पर आरोप काफी गंभीर हैं और हमें इन्हें गंभीरता से लेना होगा। सीबीआई सही दिशा में काम नहीं कर रही है। कोर्ट नोएडा निवासी वीरेंद्र नाथ सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि असम के लाटरी कारोबारी सुब्बा नेपाली नागरिक हैं। सत्तर के दशक में उनके खिलाफ नेपाल में हत्या का मामला दर्ज हुआ और वह भागकर भारत आ गए। अतिरिक्त सालिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मंण्यम और सांसद की ओर से पैरवी कर रहे वरिष् अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के तर्को से कोर्ट सहमत नहीं हुई। वकीलों का तर्क था कि सीबीआई ने नेपाल सरकार के साथ मिलकर मामले की गहराई से जांच की है। इसके लिए इंटरपोल की मदद भी ली गई। कोर्ट ने सुब्रह्मंण्यम से कहा कि पहले भारत में जो है उसे खोजें फिर नेपाल जाएं। पी ने पूछा कि क्या सीबीआई ने सुब्बा से पूछताछ की। पी ने कहा कि सुब्बा को अपनी राष्ट्रीयता सिद्ध करनी होगी। उन्हें अपने दस्तावेज साबित करने होंगे। सुब्बा की नागरिकता पर गंभीर विवाद का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर यह साधारण नागरिक का मामला होता तो इसमें विरोधाभासी चीजें सामने नहीं आतीं। |