प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार को असम का दौरा कर रहे हैं. अपने असम दौरे से पहले
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मंगलवार को असम का दौरा कर रहे हैं. अपने असम दौरे से पहले मनमोहन सिंह ने कहा कि हिंसा का रास्ता अपनानेवालों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. मनमोहन सिंह फिलीपींस में दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संग न यानी आसियान की बै क में हिस्सा लेने के बाद सोमवार को सीधे कोलकाता पहुँचे. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि हिंसा छोड़नेवाले किसी भी संग न से बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं. उनका कहना था कि यह काफ़ी दुखद है कि हाल में हुई हिंसा में इतने नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था.  |  यह दुखद है कि हाल में हुई हिंसा में इतने नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. हिंसा का रास्ता अपनानेवालों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह |
प्रधानमंत्री हिंदीभाषियों के ख़िलाफ़ हिंसा से प्रभावित असम के तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ इलाक़ों का दौरा करेंगे. ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों की हिंसा में 70 लोगों को मार दिया गया था जिसमें अधिकतर हिंदीभाषी थे जो वहाँ मजदूरी करते थे. अधिकारियों ने इस हिंसा के लिए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम यानी अल्फ़ा के विद्रोहियों को ज़िम्मेदार हराया है. सैन्य अभियान पत्रकार सलमान रावी के अनुसार असम में सुरक्षाबलों ने अल्फ़ा विद्रोहियों के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान शुरू किया है जिसमें हज़ारों सैनिक भाग ले रहे हैं.  | | | असम में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान चलाया जा रहा है |
सैन्य अधिकारियों का कहना है कि लगभग 20 हज़ार सैनिक और सुरक्षा बलों के जवाब इस अभियान में हिस्सा ले रहे हैं और इस अभियान के तहत अनेक जंगलों और पहाड़ी इलाक़ों में कार्रवाई की जा रही है जिनमें अरुणाचल प्रदेश से लगने वाला इलाक़ा भी शामिल है. असम में इस हिंसा को लगभग एक दशक में सबसे भीषण कहा जा रहा है और इसमें जो लोग अल्फ़ा विद्रोहियों का निशाना बने उनमें से ज़्यादातर ईंट के भट्टों में काम करते थे. इस हिंसा के बाद असम में रहने वाले हज़ारों हिंदी भाषी वहाँ से भाग रहे हैं. असम में रहने वाले हिंदी भाषी लोगों के शिविरों का केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने भी दौरा किया था. दोनों नेताओं ने लोगों को विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया था. असम के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अल्फ़ा विद्रोही 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौक़े पर हिंसा में तेज़ी ला सकते हैं. इसके अलावा फ़रवरी में असम में राष्ट्रीय खेलों का भी आयोजन किया जाना है. SAmachar :- BBC hindi Pic:- Google |