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'सांसद अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँ' सुप्रीमो सांसद की फटकार E-mail
 सुप्रीमो सांसद :- अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने हाल में घोषित इराक़ रणनीति के आलोचकों पर तीख़े प्रहार करते हुए अमरीकी संसद से कहा है कि हर बात का विरोध करना और ख़ुद कुछ भी न सुझाना, ग़ैरज़िम्मेदार रवैया है.

इराक़ रणनीति के तहत इराक़ में स्थिति का सामना करने के लिए लगभग 21 हज़ार और सैनिक भेजने का प्रस्ताव है.

अपने साप्ताहिक रेडियो भाषण में बुश ने कहा कि अमरीकी संसद के सदस्यों को हक़ है कि वे अपने विचार रखें.

लेकिन उन्होंने चुनौती दी कि इराक़ी सुरक्षा बलों के संघर्ष का सामना करने के लिए यदि अमरीकी संसद यानि कांग्रेस के पास उनकी रणनीति से बेहतर योजना है तो वे उसे सामने रखे.

राष्ट्रपति बुश का कहना था, "हमारे बहादुर सैनिकों के सामने ये अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए कि क्या उनके नेता उन्हें वो दे पाएँगे जिसकी उन्हें ज़रूरत है."

उनका कहना था, "मैं कांग्रेस के सदस्यों से अनुरोध करता हूँ कि वे अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँ - अपने विचारों को सामने रखें और ख़तरनाक़ परिस्थितियों में अपने सैनिकों को सदा सहारा दें."

 मैं कांग्रेस के सदस्यों से अनुरोध करता हूँ कि वे अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँ - अपने विचारों को सामने रखें और ख़तरनाक़ परिस्थितियों में अपने सैनिकों को सदा सहारा दें
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश

 

उनकी रणनीति की डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों ने ये कहते हुए आलोचना की थी कि इससे संघर्ष ख़तरनाक तरीक़े से बढ़ सकता है.

राइस इसराइल में

उधर अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने मध्य पूर्व यात्रा के दौरान इसराइल में अधिकारियों से बातचीत की है.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार इस दौरे का मकसद राष्ट्रपति बुश की इराक़ रणनीति के लिए अरब देशों के समर्थन हासिल करना है लेकिन कई नेता चाहते हैं कि उनके समर्थन के बदले में इसराइल-फ़लस्तीन समस्या को सुलझाने में अमरीका और सक्रिय भूमिका निभाए.

इससे पहले अमरीका ने चेतावनी दी थी कि इराक़ में सीरिया और ईरान की दखलंदाज़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में राइस ने ईरान को विशेष तौर पर निशाना बनाया. उन्होंने आरोप लगाया कि अमरीकी सैनिकों पर हमले के लिए ईरान इराक़ी चरमपंथियों को अत्याधुनिक विस्फोटक उपकरण मुहैया करा रहा है.

उन्होंने ईरान की गतिविधियों को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया.

राइस ने कहा कि अरब नेताओं को अमरीकी मुहिम में साथ देना चाहिए क्योंकि स्थिर इराक़ उनके हक़ में होगा.

 
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