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राज्यसभा सांसद अमर सिंह किसानों को लाभकारी मूल्य के लिए आलू नीति शीघ्र E-mail
 विकास परिषद के अध्यक्ष अमर सिंह ने घोषणा की है कि आलू किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए प्रदेश में शीघ्र ही आलू नीति बनेगी। यह नीति उसी प्रकार होगी जैसे गन्ना किसानों को लाभान्वित करने के लिए चीनी उद्योग नीति बनायी गयी है। अधिकारियों से उन्होंने कहा कि इस मामले में सभी राजनीतिक दलों के जानकारों, वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों से राय लेकर नीति में उन्हें शामिल किया जाय।
   विकास परिषद अध्यक्ष ने कहा कि अब यह चुनावी वर्ष नहीं, चुनावी महीने हैं इसको देखते हुए इसको शीघ्र तैयार किया जाय जिससे खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ने वाली इकाइयों को भी इसका लाभ मिल सके।
   वह आज यहां 'आलू विकास का परिदृश्य एवं संभावनाएं' विषयक संगोष् ी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आलू उत्पादन से पांच लाख किसान जुड़े हैं और कई बार ऐसा होता है कि आलू किसानों को उनके खर्च की भरपाई भी नहीं हो पाती है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परिवर्तन बेहद मुश्किल काम है। चीनी नीति को प्रतिफलित करने के लिए उन्हें डेढ़ साल लग गये। अब भी रुग्ण इकाइयां सरकार के कंधे पर लाश की तरह हैं क्योंकि विकास के मुद्दों पर भी लोग राजनीति करते हैं। इसी वजह से रुग्ण मिलों के परिवर्तन के मामले में भी राजनीति जीत गयी और विकास हार गया।
   गन्ने का उत्पादन प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने मुलायम सिंह यादव की तुलना कृषि मंत्री शरद पवार से करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में जिस तरह श्री पवार ने गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उ ाया वही काम उत्तर प्रदेश में श्री यादव ने किया है। पिछले तीन साल में 32 हजार करोड़ का नगद भुगतान गन्ना किसानों को किया गया है।
   भूमि विकास तथा जल संसाधन मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि आलू की खपत के लिए जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी प्रसंस्करण इकाइयां लगें वहीं पूर्वी प्रदेश में इकाइयां स्थापित की जानी चाहिए।
   संगोष् ी को सम्बोधित करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि पिछले साल जहां 100.86 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ वहीं इस बार 117 लाख टन आलू के उत्पादन की संभावना है।
 
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