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सुप्रीम कोर्ट ने रिश्वत लेकर सवाल पूछने के मामले में 11 सांसदों
को बर्ख़ास्त करने के संसद के फ़ैसले को सही हराया है. रिश्वत लेकर सवाल पूछने के मामले में बर्ख़ास्त सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में इन सांसदों ने कहा था कि मामले की जाँच के लिए ग ित संसद की जाँच समिति के समक्ष उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया. सांसदों ने अपील की थी कि बर्ख़ास्तगी के मद्देनज़र खाली हुई सीटों पर उपचुनाव न कराए जाएँ जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में मान लिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की पाँचसदस्यीय संवैधानिक पी ने चार-एक के बहुमत से बुधवार को दिए फ़ैसले में कहा कि सांसदों की बर्ख़ास्तगी की प्रक्रिया में कुछ भी गलत नहीं था. अदालत ने कहा कि सदन की गरिमा कम करने या ख़राब आचरण के लिए सासंद को निष्कासित करने का अधिकार संसद को है. बर्ख़ास्तगी संसद में पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में लोकसभा के 10 सांसदों और राज्यसभा के एक सांसद को दोनों सदनों ने दिसंबर 2005 में बर्ख़ास्त कर दिया था. बर्ख़ास्त सांसदों में भाजपा के छह, बीएसपी के तीन और कांग्रेस और आरजेडी का एक-एक सांसद शामिल है. सबसे पहले राज्यसभा ने चर्चा के बाद छत्रपाल सिंह लोधा को बर्ख़ास्त करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया. एक टेलीविज़न चैनल ने पिछले साल वीडियो टेप का प्रसारण किया था जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को संसद में प्रश्न पूछने के लिए घूस लेते दिखाया गया था. |